दीपावली पर घर की सजावट और वास्तु टिप्स – दीवाली पर घर की सजावट ऐसे करे की लक्ष्मी ठहर जाये

Deepwali par Ghar Ki Sajavat or Vastu Tips in Hindi

दीपावली पर घर की सजावट और वास्तु टिप्स – Deepwali par Ghar Ki Sajavat or Vastu Tips in Hindi

Deepwali par Ghar Ki Sajavat or Vastu Tips in Hindi

दीवाली पर घर की सजावट / Home decoration in Diwali

यह त्योहार आध्यात्मिक रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात अयोध्या लौटे थे। इसी खुसी में दिवाली मनाई जाती  हैं और मनाई जाती रहेगी |

दीवाली आने से पूर्व लोग अपने घरों में साफ़-सफाई और सजावट का काम शुरू कर देते है सभी के घरों में खुशियों भरा माहौल होता है हर कोई दिवाली में लक्ष्मी माँ के स्वागत के लिए अपने घर को सजाना चाहता है. इसके लिए वह आवश्यक खर्च भी करता है लेकिन यह जरूरी नहीं कि हम घर की सजावट के लिए बहुत सारा पैसा खर्च करे कम बजट में भी आप अपने घर को बेहतर ढंग से सजा सकती है इसके लिए आपमें थोड़ी क्रिएटिविटी होनी चाहिए.

दीवाली पर अपने घर को सजाने के सरल तरीके – Deepawali par Apne Ghar ko Sajane ke Easy tips

हम सभी यह चाहते है कि हमारे घर की सजावट पारंपरिक होने के साथ-साथ दूसरों से कुछ हट कर हो. दीवाली के त्यौहार में घर पर मेहमानों का आना-जाना लगा ही रहता है इसीलिए हर कोई चाहता है की उसके घर की सजावट की तारीफ़ हो अपने घर हो सजाने के लिए आप कुछ आसान तरीके अपना सकते है.

कैसी हो मुख्य द्वार की सजावट – How to main gate decoration

दीपावली में घर की सजावट मुख्य दरवाजे के बिना अधूरी होती है आपके घर का प्रवेश द्वार आकर्षक होना बहुत ही जरूरी है. अपने घर के मुख्य द्वार की सजावट के लिए आप फूलों या मिट्टी के डेकोरेशन पीस का इस्तेमाल कर सकते है.

आप अपने घर के मुख्य द्वार पर रंग-बिरंगी विंड चाइम लगा सकती हैं फेंग्शुई के अनुसार अपने घर के मुख्य द्वार पर विंड चाइम लगाने से घर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को रोक जा सकता है. आप दरवाजे के पास मिट्टी के बने आकर्षक गमलों या बर्तनों में पानी भर कर उसमें 5 से 7 सुंदर फूल डालकर सजा सकती हैं. आप मुख्य द्वार की सजावट के लिए आम के पत्तों या गुलाब के फूलों की माला भी लगा सकती हैं. आप अपने मुख्य द्वार की शोभा बढ़ाने के लिए रंगोली भी बना सकती है.

घर की दीवारों का लुक चेंज करे – Change the look of the walls of the house

आप अपने घर की अच्छी तरह सफाई करके घर की फर्श को या दीवारों को अलग लुक दे सकती है आप घर के फर्श पर सुन्दर कार्पेट का इस्तेमाल कर सकती है साथ ही घर की दीवारों पर आप नये पेंटींग का यूज़ कर या वाल पेपर यूज़ कर नया लुक दे सकते है.

कम बजट में घर की सजावट –

घर के लिविंग रूम की सजावट – decoration of living room

अगर दीवाली में पूरे घर में रंग-रोगन कराना आपके बजट से बाहर है तो इसके लिए आपको परेसान होने की जरूरत नहीं है आप पूरे घर की बजाय अपने ड्राइंग रूम किसी भी एक दीवार को गहरे रंग में रंग कर नया लुक दे सकती हैं, इसके अलावा सोफे के ऊपर के भाग में गहरा शेड लगा कर दीवार पर आर्ट वर्क कर सकती हैं. आजकल पेपर वर्क, पेपर पेस्टिंग बहुत ज्यादा चलन में है. आप अपने सोफे पर सुन्दर कवर और कुशन को लगा सकते है. कुशन के कवर कॉन्ट्रास्ट में लगाए और आप इन्हें अपने घर के खिड़कियों और दरवाजों से मैच करता हुआ भी रख सकती है.

अपने घर के फर्श पर आर्टिफिशियल फ्लोरिंग से पाएं नया लुक – Get a new look on the floor of the artificial flooring of your home

अगर आपके घर का फर्श खराब हो गया है या पुराने फैशन का है तो इसके लिए आप फ्लोरिंग मैटीरियल का यूज़ कर अपने फर्श को नया लुक दे सकते है. फ्लोरिंग मैटीरियल हर रंग व डिजाइन में बाजार में आसानी से मिल जाते है.

घर को परदों से दे नया लुक – Give a new look to the home curtain

अगर अपने अपने घर में काफी समय से परदे चेंज नहीं किये है तो यह बिकुल सही समय है अपने घर के पर्दों को चेंज करने का, इसके लिए या तो आप बाजार से नए परदे लाकर लगा सकती है यदि यह आपके बजट से बाहर है तो आप पुराने पर्दो को थोड़ी सी क्रिएटिविटी के साथ नया लुक दे सकती है इसके लिए आप सबसे पहले तो अपने पुराने परदों को अच्छी तरह से धो कर सुखा लें और फिर इन पर्दों के रंग से मेल खाते रिबन या गोटे लाकर इन्हें सजा सकती है जैसे परदों के किनारों पर घुंघरू लगाकर, पर्दों के किनारों में सुन्दर सी लैस भी लगा सकती हैं.

घर के फर्नीचर को फिर से सही जगह पर लगाए – Re-arrange the furniture to home

हमारे घर का फर्नीचर हमारे घर में नयी जान डाल देता हैं, बहुत से लोग घर के फर्नीचर को एक ही जगह पर रखते है जिससे देखने वालों को कोई नया पन नहीं लगता है इसीलिए अपने घर को नया लुक देने के लिए घर के फर्नीचर को कुछ अलग तरीके से री-अरेंज करे इससे आपके ड्राइंग रूम में एक नयापन आ जाएगा.आप अपने घर के फर्नीचर को नए कवर लगाकर भी सुन्दर बना सकते है.

दीवाली पर इनडोर प्लांट्स से करे घर की सजावट – Diwali the home decoration of indoor plants

दीवाली पर आप अपने घर को इनडोर प्लांट्स से सजा सकती है अगर पहले से ही घर में इंडोर प्लांट्स है तो आप इन्हें अछि तरह से गीले कपडे से साफ़ कर सकती है या आप इनके गमले को पेंट भी करा सकती हैं.

इस तरह आप भी इस बार दीवाली पर अपने घर को अच्छे तरीके से नया लुक दे सकते है जिससे आपका घर भी चमक उठेगा.

दीवाली पर सुख समृद्घि के लिए अपनाएं वास्तु टिप्स – Diwali Vastu Tips

Deepwali par Ghar Ki Sajavat or Vastu Tips in Hindi

भारत में पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाए जाने वाले प्रमुख त्यौहारों में से एक दीपावली का त्यौहार है। भारत के अलावा दीपावली का पवित्र उत्सव अब विश्व के अन्य देशों में भी मनाया जाता है, विशेषकर जहां भारतीय लोग बहुत संख्या में बसते हैं। इस मौके पर हिन्दु लोग अपने घरों को बहुत खूबसूरत व विविध तरीकों से सजाते हैं एवं घरों के मुख्य द्वार या घर के भीतर रंग बरंगी रंगोली बनाई जाती है। साथ ही, बिजलई लड़ियों से पूरे घर को जगमगा दिया जाता है। इस मौके पर रातों को पटाखों की ठाठ ठाठ सुनाई एवं दिन में बाजारों में खरीददारी के लिए भीड़ दिखाई पड़ती है। इसके अलावा इस मौके पर उपहारों एवं मिठाईयों के लेन देन का व्यवहार भी होता है।
इस उत्सव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता भगवान श्रीगणेश, हिन्दू देवी देवताओं, धन की देवी लक्ष्मी, ज्ञान की देवी सरस्वती, शक्ति की प्रतीक मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है, ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके।

मान्यता के अनुसार देवी देवताओं का आशीर्वाद एवं दिव्य शक्तियां केवल उन उपासकों को प्राप्त होती हैं, जो अपने घरों को अच्छे से सजाते हैं, स्वच्छ रखते हैं। इसलिए बहुत जरूरी हो जाता है कि आप अपने घर को स्वच्छ रखें, यदि आप अपने घर में मां लक्ष्मी का प्रवेश चाहते हैं। आप अपने घर के मुख्य द्वार पर छोटे से पैरों के निशान बनाकर मां लक्ष्मी का स्वागत करें। यह पैरों के निशान आपके जीवन एवं घर में सुख समृद्घि लेकर आएंगे। इसके अलावा आप अपने घर तथा जीवन में खुशहाली, प्रसन्नता, समृद्घि, विशालता, सुगमता लाने के लिए वास्तु टिप्स का पालन करें।

पूजा कक्ष या स्थल को व्यवस्थित करें – Pooja Kaksh ko manage kre

घर का पूर्वोत्तर कोना पूजा घर के लिए सबसे अनुकूल स्थान है। इसलिए यदि हो सके तो पूजा घर को अनुकूल दिशा में ही स्थापित करें। यदि संभव नहीं तो इसको आप पूर्व में स्थापित कर सकते हैं। इस पवित्र स्थान की सजावट के दौरान काले रंग का बिल्कुल इस्तेमाल न करें। फोटो एवं मूर्तियों की सफाई के लिए स्वच्छ एवं नया कपड़ा इस्तेमाल करें। इस कपड़े को अन्य कार्यों के लिए बिल्कुल इस्तेमाल न करें। पूजा करने के समय काले या अन्य गाढ़े रंग के कपड़े बिल्कुल न पहनें। इस पवित्र पर्व पर आप अपने घर के मंदिर को दिव्य स्पर्श देने के लिए मंदिर में अभिमंत्रित मेरुपरुष श्रीयंत्र की स्थापना करें एवं इसको दीवाली या धनतेरस के मौके किसी शुभ मुहुर्त में अपने घर पर लेकर आएं।

मूर्ति को सही जगह रखें – Murti ko sahi Gagha par rakhe

घर का उत्तरी हिस्सा धन संपत्ति से संबंधित होता है। इसलिए, लक्ष्मी पूजन घर के उत्तरी हिस्से में करना चाहिए। हालांकि, पूजा घर या स्थल पर एक ही भगवान या देवी की दो मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। भगवान गणेश की मूर्ति को हमेशा मां लक्ष्मी की मूर्ति के बाएं हाथ रखें, जबकि मां सरस्वती को दाहिनी तरफ रखें। देवी देवता की मूर्तियों को हमेशा सही तरीके से एवं सही क्रम में रखें। मूर्तियों को ईशान कोण अर्थात उत्तर पूर्व दिशा में रखें जबकि पानी की छवि एवं कलश को पूजा स्थल की पूर्व या उत्तर दिशा में रखें। मूर्तियों की मुख हमेशा मंदिर के मुख्य द्वार की तरफ होना चाहिए, इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

बर्बादी और अव्यवस्था से पाए छुटकारा –

गणेशजी कह रहे हैं कि दीवाली से पहले अपने घर को साफ सुथरा बनाए। घर के अंदर जो भी फालतू वस्तुएं हैं, जिनका आप उपयोग नहीं करते, एवं भविष्य में उपयोग लायक भी नहीं हैं, ऐसी वस्तुओं को घर से बाहर निकालें। वस्तु के अनुसार घर का प्रवेश द्वार संभावनाओं से संबंधित है। इसलिए इस बात का ध्यान रहे कि आपका मुख्य द्वार पूर्ण रूप से खुलता हो। उसके आस पास किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए, अन्यथा दिव्य शक्ति आपके घर में प्रवेश करने से चूक जाएगी। इसके अलावा आप अपने घर के मुख्य हाल को भी स्वच्छ रखें, क्योंकि यहां पर आप बाहरी लोगों से अधिक मिलते हैं।

काली चौदस – Kali Chodas

घर से नकारात्मक चीजों को दूर करने के लिए काली चौदस का दिन सबसे बेहतर है। काली चौदस के दिन मां काली या भगवान हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए, ताकि नकारात्मक शक्तियों को घर से दूर किया जा सके एवं घर में स्वास्थ्य, सुख, समृद्घि का आगमन हो सके। घर तथा कार्यालय से नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए हिन्दु धार्मिक ग्रंथों में बहुत सारे विधि विधान बताए हुए हैं। आप इन विधि विधानों के जरिये आप अपने घर व परिवार को काले जादू एवं भूम प्रेतों से सुरक्षित रख पाने में सफल होंगे।

इसके अलावा आप सकारात्मक शक्ति प्राप्त करने के लिए मंत्र उच्चारण कर सकते हैं। मंत्र विज्ञान के अनुसार विभिन्न देवी-देवताओं का कवच होता है, जैसे कि लक्ष्मी कवच, दुर्गा कवच, शिव कवच, राम कवच, हनुमान कवच आदि एवं इन मंत्रों के उच्चारण से शक्तियों को प्राप्त किया जा सकता है। गणेशजी की सलाह है कि परिवार के प्रत्येक सदस्य को पूजा घर में मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए।

वज्रहस्ता – हमारे के लिए अति महत्वपूर्ण पांच वायु को सुरक्षा प्रदान करता है एवं कल्याणशोभाना हमारी जीवन शक्ति को सुरक्षा प्रदान करता है।

देवी योगिनी – हमारी इंद्रियों जैसे कि कान, नाक, जीभ आदि की रक्षा करती हैं। नारायणी हमें सुरक्षा प्रदान करता है।

वराही देवी – हमारे जीवन की रक्षा करती। वैशनवी हमारे धर्म की रक्षा करती है। लक्ष्मी हमारी सफलता की रक्षा करती है। चक्रणि हमारी धन दौलत व विद्या की रक्षा करती है।

गुगल धूप –

दीवाली के पवित्र अवसर पर आपको अपने घर के हर कोने में गुगल धूप करन चाहिए। गणेशजी कहते हैं कि वास्तु पुरुषगण द्वारपाल, क्षेत्रपाल एवं दिशा पाल गुगल धूप से शक्तिशाली होते हैं। इसके अलावा गुगल धूप घर को तनाव रहित बनाने में अहम भूमिका निभाती है। यदि संभव हो तो प्रत्येक दिवस गुगल धूप करनी चाहिए।

नमकीन जल छिड़काव –

जल के भीतर नमक मिलाएं एवं पूरे घर में अंदर इसका छिड़काव करें। गणेशजी की सलाह है कि दीवाली के आस पास तो नित्य आप नमकीन जल का छिड़काव करें, जो अति लाभदायक सिद्घ होगा। इस तरह की मान्यता है कि नमक वायु से नकारात्मकता को शोख लेते है एवं घर के भीतर एक सकारात्मक वातावरण सृजित करता है। इस विधि का इस्तेमाल सप्ताह में दो बार करना चाहिए। छिड़काव करने के बाद हाथ साफ करना न भूलें।

सक्रिय मेरुपुरुष श्री यंत्र की स्थापना अपने घर या कार्यालय में बने पूजा स्थल पर मेरुपुरुष श्री यंत्र की स्थापना कर सकते हैं।

मां लक्ष्मी को अपने घर कैसे बुलायें – Lakshmiji ko Apne ghar kese Bulave

कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में झिलमिल दीपों के बीच महालक्ष्मी का क्षीर सागर से धरा पर आगमन होता है। वे घर-घर में घूम-घाम कर अपने रहने योग्य स्थान का चयन करती हैं। जहां उनके अनुरूप वातावरण होता है, वहां रूक जाती हैं। लक्ष्मी जी हमारे घर में रूकें इस लिए हम प्रतिवर्ष उनकी विशेष पूजा-उपासना करके उन्हें प्रसन्न करते हैं ताकि हमारा घर वर्ष भर समृद्धि से परिपूर्ण रहे। प्रत्येक लोक में मां लक्ष्मी को धन एवं ऐश्वर्य की महादेवी माना जाता है। धन का मानव जीवन में बहुत महत्व है। धन न हो तो कोई भी कार्य नहीं हो सकता।

दीपोत्सव का पर्व वस्तुतः चार पर्वों का समुच्चय हैं।

1. कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी,
2. नरक चतुर्दशी,
३. दीपावली एवं
४. अन्नकूट,

– ये चारों पर्व मिलकर दीपावली पर्व को पूर्णता प्रदान करते हैं। दीपावली पर्व मनाने के लिए कई दिनों पूर्व पूरे घर की सफाई, घर क बाहर की सफाई, जहां कूड़ा फेंका जाता है, उस स्थान की सफाई कर के, हम लक्ष्मी मां के आगमन की तैयारी करते हैं। जहां साफ-सफाई होती है वहां बीमारी नहीं फैलती, जहां स्वस्थ व्यक्ति रहते हैं, वहा लक्ष्मी स्वतः वैभव के साथ आती है।
– इसलिए वर्ष में पूरे घर की सफाई,
– घर के बाहर की सफाई किताबों व फाइलों आदि की सफाई,
– परिधानों व पर्दों आदि की सफाई करके हम लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी करते हैं। हर हिंदू परिवार में दीपावली की रात्रि को धन-संपदा की प्राप्ति हेतु लक्ष्मी का पूजन होता है। ऐसा माना जाता है कि दीपावली की रात लक्ष्मी जी घर में आती हैं। इसीलिए लोग दहलीज से लेकर घर के अंदर जाते हुए लक्ष्मी जी के पांव (चरण) बनाते हैं। पुराणों के आधार पर कुल और गोत्रादि के अनुसार लक्ष्मी-पूजन की अनेक तिथियां प्रचलित रहीं, लेकिन दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन को विशेष लोकप्रियता प्राप्त हुई है।

लक्ष्मी को चंचला कहा गया है जो कभी एक स्थान पर रूकती नहीं। अतः उसे स्थायी बनाने के लिए कुछ उपाय, पूजन, आराधना, मंत्र-जाप आदि का विधान है।

लक्ष्मी साधना गोपनीय एवं दुर्लभ कही गई है। इसका मुख्य कारण विश्वामित्र का कठोर आदेश ही है। विश्वामित्र ने कहा था – इस लक्ष्मी प्रयोग को सदैव गुप्त ही रखना चाहिए और जीवन के अंत में अपने अत्यंत प्रिय एवं सुयोग्य शिष्य को लक्ष्मी साधना समझाई जानी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि समुद्र-मंथन में लक्ष्मी के प्रकट होने पर इन्द्र ने उनकी स्तुति की, जिससे प्रसन्न होकर लक्ष्मी ने इन्द्र को वरदान दिया कि तुम्हारे द्वारा दिए गए इस द्वादशाक्षर मंत्र का जो व्यक्ति नियमित रूप से प्रतिदिन तीनों संध्याओं में भक्तिपूर्वक जप करेगा, वह कुबेर सदृश ऐश्वर्य युक्त हो जाएगा। इस प्रकार से लक्ष्मी जी की पूजन विधि प्रचलित हुई।

लक्ष्मी जी का वास कहां है जाने ? Lakshmiji ka Vass Kahan Hain

महर्षि वेद व्यास का कहना है

धृतिः शमो दमः शौच कारूण्य बागनिष्ठुरा। मित्राणां चानभिद्रोहः सप्तैताः समिधः श्रियः।
– अर्थात धैर्य, मनोनिग्रह, इन्द्रियों को वश में करना, दया मधुर वाक्य और मित्रों से वैर न करना ये सात बातें लक्ष्मी (ऐश्वर्य) को बढ़ाने वाली हैं।

हितोपदेश में कहा गया है – उत्साह सम्पन्नम् दीर्घसूत्रं क्रिया विधिज्ञं असेनष्व सक्तम्। शूरं कृतज्ञं दृढ़ सौर दंच लक्ष्मी स्वयं यति निवास हेतो हितोपदेश-178 अर्थात उत्साही, आलस्यहीन, कार्य करने की विधि जानने वाला, अस्त्रों से रहित, शूर, उपकार मानने वाला तथा दृढ़ मित्रता वाले मनुष्य के पास लक्ष्मी स्वतः ही निवास के लिए पहुंच जाती हैं।
शारदातिलक में उल्लेख किया गया है कि अधिक श्री की कामना करने वाले व्यक्ति को सदा सत्यवादी होना चाहिए, पश्चिम की ओर मुंह करके भोजन करना तथा हंसमुख मधुर भाषण करना चाहिए।

एक बार लोक कल्याण के लिए प्रद्युम्न की माता रूक्मिणी ने लक्ष्मी जी से पूछा – देवी – आप किस स्थान पर और किस प्रकार के मनुष्यों के पास रहती है ? लक्ष्मी जी ने उत्तर दिया – जो मनुष्य मितभाषी, कार्य कुशल, क्रोधहीन, भक्त, कृतज्ञ, जितेंद्रिय और उदार है, उनके यहां मेरा निवास होता है। सदाचारी, धर्मज्ञ, बड़े बूढ़ों की सेवा में तत्पर, पुण्यात्मा, क्षमाशील और बुद्धिमान मनुष्यों के पास सदा रहती हूं। जो स्त्रियां पति की सेवा करती हैं, जिनमें क्षमा, सत्य, इंद्रिय-संयम, सरलता आदि सद्गुण होते हैं, जो ब्राह्मणों तथा देवताओं में श्रद्धा रखती हैं, जिनमें सभी प्रकार के शुभ लक्षण मौजूद हैं, उनके समीप मैं निवास करती हूं। जिस घर में सदैव होम होता है, और देवता, गौ तथा ब्राह्मणों की पूजा होती है, उस घर को मैं कभी नहीं छोड़ती।

लक्ष्मी कहां नहीं रहती है जाने –

उसके विषय में मार्कण्डेय पुराण ,तथा शारंगधर पद्धति , में कहा गया है की जिसके वस्त्र तथा दांत गंदे हैं, जो काफी खाता है तथा निष्ठुर भाषण करता है, जो सूर्यास्तकाल में भी सोया रहता है, वह चाहे चक्रपाणि विष्णु ही क्यों न हो, उसका लक्ष्मी परित्याग कर देती है।
वृहद्दैवतुरंजनम् में कहा गया है कि पराया अन्न, दूसरों के वस्त्र, पराया यान (सवारी), पराई स्त्री और परगृह वास – ये इन्द्र की श्री संपत्ति को भी हरण कर लेते हैं। लक्ष्मी जी का कथन है कि जो आलसी, क्रोधी, कृपण, व्यसनी, अपव्यययी, दुराचारी, कटु वचन बोलने वाले, अदूरदर्शी और अहंकारी होते हैं, उनके कितने ही प्रयत्न करने पर भी मैं अधिक दिन नहीं ठहरती।

महाभारत/शांति पर्व में उल्लेख मिलता है कि दैत्यराज बलि ने एक बार उच्छिष्ट भक्षण कर ब्राह्मणों का विरोध किया। श्री ने उसी समय बलि का घर त्याग दिया। लक्ष्मी ने कहा, चोरी, दुव्र्यसन, अपवित्रता एवं अशांति से मैं घृणा करती हैूं। इसी कारण आज मैं राजा बलि के राज्य का त्याग कर रही हूं भले ही वह मेरा अत्यंत प्रिय भक्त रहा है। लक्ष्मी जी को अपने घर बुलाएं तो कैसे यद्यपि मनुष्य पर्याप्त कार्य करता है, किंतु कर्मानुसार फल नहीं मिलता है, क्योंकि भाग्य उन्हें सहयोग नहीं देता एवं दरिद्रता तथा निर्धनता उसका साथ नहीं छोड़ती। जन्मकुंडली का द्वितीय भाव, धन, संपत्ति व वैभव कोष का भाव होता है।

द्वितीयेश व द्वितीय भाव पर स्थित ग्रहों का विशेष महत्व –
– शुक्र भोग तथा विलास का कारक ग्रह है, जो जीवन में भोग-विलास व काम प्रदान करता है। यह जीवन में वैभव तथा समृद्धि का प्रतीक है।
शनि कष्ट, दरिद्रता व अभावों का कारक ग्रह है। शनि मंत्र ‘ऊँ शं शनैश्चराय नमः’ अथवा ‘ऊं प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः मंत्र का कम से कम 23 हजार जप करें। उड़द, तिल, तेल, लोहा, काला वस्त्र, फूल या नीलम का यथाशक्ति दान कराएं। घर के पूजा गृह में दीपावली के दिन श्री यंत्र की स्थापना करें। महालक्ष्मी को कमल गट्टे की असली माला पहनायें। ‘ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्म्यै नमः’ का जाप करें। जप रूद्राक्ष, स्फटिक, लाल चंदन या कमल गट्टे की माला से करें। दीपावली के दिन शास्त्रोक्त विधि से मां लक्ष्मी की पूजा करें।

श्री सूक्त’ का यथेष्ठ पाठ, धन प्राप्ति के लिए अचूक उपाय माना जाता है।

  • एक मुखी रुद्राक्ष समस्त कामनाओं को पूर्ण करता है।
  • 6-7 मुखी रुद्राक्ष मालाओं से महालक्ष्मी मंत्र का जाप करें।

प्रेम के दीप में सत्य की लौ जले, जगमगाता रहे हर्ष से घर तेरा। विपदा की घटाएं छटें शीघ्र ही, चमचमाता रहे चांद सा घर तेरा ।

दिवाली से पहले करें कुबेर के स्वागत की तैयारी – Diwali Ki Tyari / Kuber Ki Tyari

  • धनतेरस पर धन के देवता कुबेर और मृत्यु के देवता यमराज की पूजा करने का विधान है। उत्तर दिशा को कुबेर का स्थान माना जाता है। इस स्थान को जितना हो सके खाली रखें और प्रतिदिन सुबह पानी से धोकर साफ करें। फिर तांबे के बर्तन में गंगा जल लेकर उत्तर दिशा और तिजोरी में छिड़काव करें, इस उपाय से कुबेर के स्वागत की तैयारी होती है।
  • मां लक्ष्मी और कुबेर जी का चित्र अथवा श्री रूप उत्तर दिशा की ओर स्थापित करें। इससे उत्तर दिशा सक्रिय होगी एवं धन आगमन में आने वाली समस्त बाधाओं का नाश होगा।
  • रुका हुआ धन पुन : प्राप्त करने के लिए दीपावली की रात्रि को एक मिट्टी अथवा आटे का चौमुख दीपक बना देसी घी, तिल के तेल से भर कर उसमें 4 बत्तियां रुई की रख के किसी चौराहे पर अद्र्ध रात्रि को जलाएं। उस दीपक में 3 काले हकीक एक-एक करके जिससे रुपया वापस लेना है उसका नाम लेकर डाल दें। दीपक के ऊपर नागकेसर, जावित्री, काले तिल एक-एक चम्मच भी डाल दें। यह क्रम आगे भी वर्ष भर हर अमावस को करते रहें।

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