गोवर्धन पूजा कविता, Govardhan Puja Kavita or Poem

गोवर्धन पूजा कविता, Govardhan Puja Kavita or Poem

गोवर्धन पूजा कविता, Govardhan Puja Kavita or Poem

गोवर्धन पूजा कविता

हे! काह्ना

तेरी लीला अपरम्पार
किया तूने सबका उद्धार

तोड़ कर घमंड इन्द्र का तूने
गोवर्धन का महत्व बताया

ऊंगली पर पहाड़ उठाकर तूने
जिन्दगी का सच्चा पाठ पढ़ाया

पद से ना होता कोई महान
परोपकार ही सच्चा ज्ञान

तब से ही गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया
नदी,पहाड़ का महत्व बढ़ाया ||

Govardhan Puja Kavita or Poem

भाग्यको सिग्नलको पर्खाइमा
जीन्दगीको आधा आयू
जेब्रा क्रसिंग वारिनै रोकियो

कर्मको ज्याकपोट खुल्ने पर्खाईमा
बैशको आधा पाखो
लक्की-ड्रको रोलरमै रोकियो

यो स्पीड ब्रेकरले पनि ब्रेक गर्न नसक्ने
यौवनको फस्ट-ट्रयाकको रेललाई
भन प्रिय,
कुन अग्निको फेरो लगाउने
जग्गेमा लगौ ?
जहाँ तिमीले कल्पना गरेको
रातो गुलाफ फक्रेर
तिम्रो गालाबाट संक्रमितहुदै
सिउँदोसम्म पुग्नेछ र भन्ने छौ –
ह्याप्पी भ्यालेन्टाईन-डे !

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